जानिए कैसे विवेक कुमार पाठक ने उत्तर प्रदेश दरोगा परीक्षा में पाई सफलता

 

जानिए कैसे विवेक कुमार पाठक ने उत्तर प्रदेश दरोगा परीक्षा में पाई सफलता

नमस्कार दोस्तों,
दरोगा भर्ती में हर वर्ष बहुत बड़ी संख्या में अभ्यार्थी भाग लेते हैं। इस बात से कोई परहेज़ नहीं है कि किसी क्षेत्र का दरोगा होना कितनी बड़ी बात होती है। आप में से कई अभ्यार्थियों ने दरोगा बनने का स्वप्न रखा होगा। दोस्तों आज हम एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने वाले है जिन्होंने उत्तर प्रदेश दरोगा भर्ती में बहुत ही अच्छा अंक प्राप्त किया है साथ ही उनकी अपनी बातें कि किस प्रकार से आप भी दरोगा भर्ती में सफलता हासिल कर सकते हैं।

विवेक कुमार पाठक का सामान्य परिचय

          दोस्तों जिस व्यक्ति के बारे में हम आपको बताने वाले है उनका नाम है विवेक कुमार पाठक। विवेक कुमार पाठक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से हैं। पाठक जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्रतापगढ़ जिले से प्राप्त की तत्पश्चात उन्होंने KNIPSS सुल्तानपुर कॉलेज से B.Sc स्नातक की डिग्री हासिल की।
अपनी स्नातक समाप्त करने के बाद पाठक जी 2013 में प्रयागराज चले गए ताकि वे प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर पाए। पाठक जी के प्रयागराज आने के 4-5 महीने बाद ही उत्तर प्रदेश कांस्टेबल भर्ती की अधिसूचना जारी हुई जिसके लिए पाठक जी ने भी आवेदन दिया। उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल के अंतिम चरण की परीक्षा में ये असफल हो गए। पाठक जी कहते है कि ऐसे क्षण हर एक अभ्यार्थी के जीवन में आते हैं परन्तु कई अभ्यार्थी टूट जाते हैं ,परन्तु पाठक जी बताते हैं कि उन्होंने यह कह कर स्वयं को संभाला कि “अगर मैं इस परीक्षा में असफल हुआ हूँ तो निश्चय ही ईश्वर ने कोई बड़ा विकल्प मेरे लिए रखा होगा” .
अतः पाठक जी का कहना है कि विद्यार्थियों को छोटी छोटी असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए अपितु एक नयी सोच के साथ स्वयं को फिर से तैयार करना चाहिए।

इस घटना के बाद पाठक जी ने अपने जीवन में कई परीक्षाएँ दी परन्तु सभी परीक्षाओं में किसी न किसी कारणवश असफल होते चलें गए। परन्तु हर एक क्षण उन्होंने आत्मविश्वास को बनाये रखा।

UPSI की परीक्षा

फिर उन्होंने उत्तर प्रदेश सब इंस्पेक्टर जिसे दरोगा भर्ती भी कहते हैं उसकी परीक्षा दी। अंततः परीक्षा की घड़ी समाप्त हुई और पाठक जी को सफलता मिली।
पाठक जी अपनी असफलताओं के बारे में यह कहते हैं कि “असफलता हमें यह बताती है कि हमने सफलता के लिए पूरे मन से प्रयास नहीं किया है ” . उनका मानना है कि हर एक असफलता से सभी को सीख लेनी चाहिए असफलता आपकी कमजोरियों को उजागर करती है। अतः आप सभों को अपनी असफलता से निराश नहीं होना है अपितु आपको उससे सीख लेनी है। पाठक जी असफलता के बारें में यह भी कहते हैं कि “किसी व्यक्ति को बुद्धि बादाम खाने से नहीं बल्कि ठोकर खाने से मिलती है ” .

तैयारी करनी है तो नोटिफिकेशन मत देखिये

पाठक जी ने बताया की अगर कोई विद्यार्थी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करना चाहता है तो सबसे पहले उसे यह निश्चय करना होगा कि किस परीक्षा की तैयारी वह करना चाहता है। तत्पश्चात उसे उस परीक्षा की अधिसूचना(Notification) जारी होने की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। उस अभ्यार्थी को पूरी इच्छाशक्ति के साथ तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। क्योकि अधिसूचना आज नहीं तो कल जारी होगी ही परन्तु अगर आपकी तैयारी पूर्व से ही है तो अधिसूचना तनिक भी आपकी सफलता में बाधा उत्पन्न नहीं करेगी।

फिर पाठक जी ने बताया कि एक अभ्यार्थी को अगर सफलता हासिल करने की इच्छा है तो उसे निरंतर अभ्यास करना होगा। कम ही समय परन्तु निरंतरता बरकरार रखनी होगी। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आज 10 घंटे पढाई कर ली फिर अगले दो दिन कुछ पढ़ा ही नहीं। अतः निरंतरता को बनाये रखे जिससे कि आपकी तैयारी और सफलता के बीच की दूरी कम हो जाये।

तत्पश्चात पाठक जी ने अपनी ट्रेनिंग से संभंधित कुछ बातें बताई। पाठक जी का प्रशिक्षण केंद्र मुरादाबाद था। यहाँ उनलोगों को 4 बजे उठ जाना था सुबह 4 बजे से लेकर रात आठ बजे तक कठिन प्रशिक्षण दिया जाता था। रात आठ बजे के बाद उनलोगों को छुट्टी दी जाती थी। प्रशिक्षण के वो दिन बहुत ही यादगार रहे है ऐसा पाठक जी ने बताया।

समाप्त

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article source:- warriors adda youtube channel

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